स्वतंत्र भारत की चुनौतियां एवं विकास

15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हो गया। 14 अगस्त की मध्यरात्रि में जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में अपने एक ऐतिहासिक भाषण में कहा। रात को 12:00 बजे जब पूरा विश्व सो रहा है, तब भारत जीवन और स्वाधीनता की ओर अग्रसर है। भारत की करोड़ों जनता का सपना अब सच हो चुका था। किंतु स्वतंत्र भारत के सामने अनेक समस्याएं और चुनौतियां थी।

स्वतंत्र भारत की तत्कालीन समस्याएं

1. शरणार्थियों की समस्या

देश के विभाजन के बाद भारत और पाकिस्तान में हुए सांप्रदायिक दंगों के कारण पाकिस्तान से भारत आए। लगभग 75 हजार हिंदू, सिख और मुसलमान शरणार्थिम भाइयों को बचाने की समस्या।

निदान– भारत सरकार के करोड़ों रुपए खर्च करके इन शरणार्थियों को बसाया। शरणार्थियों को बने हुए मकान एवं भूमि दी गई।

2. देसी रियासतों का भारतीय संघ में विलय की समस्या

जब हम आजाद हुए तो देश में कुल 562रियासते थी। यदि रियासतें भारत में ना मिलती तो यह देश कई टुकड़ों में बैठ जाता और गृह युद्ध हो जाता।

निदान– उस समय के हमारे उप प्रधानमंत्री व केंद्रीय गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने बड़ी ही सूझबूझ से अधिकांश रियासतें भारत में मिला ली। इसी सूझबूझ के कारण इन्हें लौह पुरुष कहा जाता है।

3. पाकिस्तान का भारत पर आक्रमण

स्वतंत्रता के तुरंत बाद पाकिस्तानी कबायली उने कश्मीर में धावा बोलकर एक तिहाई भाग पर अधिकार कर लिया। कश्मीर के महाराजा ने भारत में सम्मिलित होने की अपील की।

निदान– भारतीय जवानों ने कश्मीर से कव्वालीयो को खदेड़ दिया। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन गया। कश्मीर का एक तिहाई हिस्से पर पाकिस्तान का आज भी अनाधिकृत कब्जा है।

4. आर्थिक समस्या

स्वतंत्रता के बाद कृषि की स्थिति अच्छी नहीं थी। हमारे देश के गेहूं और जूट उत्पादन के अधिकांश सिंचित क्षेत्र पाकिस्तान के हिस्से में हो गए थे। देश में बढ़ती जनसंख्या के कारण खाद्यान्न की समस्या थी गेहूं विदेश से आयात किया जाता था।

निदान– सरकार के लगातार प्रयास के बाद देश में खाद्यान्नों का उत्पादन बढ़ा।इसके लिए जमीदारी प्रथा को समाप्त किया गया और काश्तकारों को भूमि दी गई।आज हमारे देश में खाद्यान्न दूसरे देशों को निर्यात भी किया जाता है।

(ब) स्वराज्य की चुनौतियां?

1. संविधान का निर्माण

15 अगस्त सन 1947 के बाद भारतीय संविधान सभा का प्रभुसत्ता संपन्न संस्था हो गई थी। अब इसे भारतीय संविधान का निर्माण करना था।

निदान-भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 ईसवी में बनकर तैयार हो गया जिसे 26 जनवरी 1950 ईस्वी में लागू कर दिया गया। इसके लागू होने के साथ ही भारत गणतंत्र देश हो गया। इसी कारण हम प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मानते हैं।

2. विदेशी उपनिवेश के विलीनीकरण की समस्या

देश की स्वतंत्रता के बाद भी गोवा, दमन दीव तथा दादरा और नगर हवेली में पुर्तगालियों कथा पुडुचेरी,चंद्रनगर,माही और कारीकल पर फ्रांस का कब्जा था।

निदान– रंग सरकार ने भारत के आग्रह पर 1954 ईस्वी को पांडुचेरी चंदननगर माही और कारी कल तो सौंप दिए पुर्तगालियों ने सैनिक कार्यवाही करने पर 20 सितंबर 1961 ईस्वी को गोवा, दमन, दीव वह दादरा और नगर हवेली सौप दिया। अब कश्मीर में कन्याकुमारी तक के समस्त भू-भाग भारत के अंग बन गए।

3. विकास की योजनाएं

स्वतंत्रता के बाद देश के सामने गरीबी अशिक्षा बेरोजगारी सामाजिक आर्थिक विषमताओं से समाज को मुक्त कराएं की समस्याएं गंभीर थी।

निदान– सरकार ने देश में सभी क्षेत्रों का चरणबद्ध तरीकों से विकास के लिए 15 मार्च 1950 ईस्वी में योजना आयोग का गठन किया।योजना आयोग के माध्यम से पंचवर्षीय योजनाओं को प्रारंभ किया।1 अप्रैल सन 1951 को प्रथम पंचवर्षीय योजना लागू की गई थी। 31 मार्च 2017 ईस्वी तक 12 पंचवर्षीय योजना पूर्ण हो चुकी है। 2014 ईस्वी में भारत सरकार ने योजना आयोग समाप्त कर जनवरी 2015 ईस्वी में नीति आयोग को प्रारंभ किया।इस आयोग के माध्यम से देश के विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

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