गणित का इतिहास

गणित अत्यंत प्राचीन एवं महत्वपूर्ण विषय है। भारतवर्ष में वैदिक काल में गणित का स्थान सर्वोपरि रहा है। वेदांग ज्योतिष में गणित की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा गया है की जिस प्रकार मयूर ओं की शाखाएं और सड़कों की मडिया उनके शरीर पर मस्तक पर विराजमान हैं। उसी प्रकार वेदों के सब अंगों तथा शास्त्रों में गणित सर्वोपरि है। 12 वीं शताब्दी तक भारत का गणित के क्षेत्र में प्रथम स्थान रहा है। गणित का इतिहास कई हज़ार साल पहले से मन जाता है।

गणित का इतिहास
गणित की प्रकृति
गणित की भाषा और व्याकरण
गणित की विशेषताएं
गणित का महत्व
आधुनिक गणित का विकास

गणित का इतिहास

प्राचीन गणित का इतिहास काफी पुराना है। प्रसिद्ध गणितज्ञ के बारे में कहा है कि बहुत अधिक करने से क्या लाभ है। इस सदाचार जगत में जो कुछ भी वस्तु है वह सब गणित के बिना समझना मुश्किल है। इस तथ्य का भारतीय मनीषियों दर्शन को तत्वों को बड़ी बात ज्ञान था।

इसी कारण उन्होंने प्रारंभ से ही गणित के विकास पर जोर दिया। प्राचीन में अरब देशों में गणित का ज्ञान नाम मात्र था। भारत इस क्षेत्र में बहुत कर चुका था। व्यापार करने के लिए लोग अरब व अन्य देशों से यहां आते थे। उन्ही के द्वारा गणित का अन्य देशों में फैला। समय-समय पर अनेक विदेशी ज्ञान जिज्ञासु भी आए उन्होंने यहां के गढ़ की ज्ञान को अपने देश में पहुंचाया।

भारतीय गणित का शुभारंभ ऋग्वेद में मिलता है। इसके प्राचीन गणित इतिहास को पांच खंडों में विभाजित किया गया है।

  • आदिकाल
  • पूर्व मध्यकाल
  • मध्यकाल तथा स्वर्णकाल
  • उत्तर मध्य काल
  • वर्तमान काल
कालगणितज्ञ
आदिकालबोधायन, आपस्तंभ
पूर्व मध्यकालआचार्य यति व्रषभ
मध्यकाल तथा स्वर्णकालब्रह्मगुप्त
उत्तर मध्य कालभस्करचार्य द्वितीय, नीलकंठ, नारायण पंडित
वर्तमान कालरामानुजन, नरसिंघ बापूदेव शास्त्री, सुधाकर द्विवेदी

गणित की आज जो स्थिति है उसको प्राचीन से आज तक के गणितज्ञों ने महान बनाया है।

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